collaction no 170


 तू सुगंध है! सुगंध किसी की मिल्कियत नहीं हुआ करती, तू मेरी मिल्कियत नहीं। सुगंध एहसास के लिए हैं, बाजुओं में उसकी कल्पना धोखा है, अपने आप से धोखे में जीना खुद को कत्ल करना है। मैने खुद को कत्ल किया है। मैने हर पल ज़हर पिया है। हर सोच में तू मेरी है, सिर्फ मेरी और हकीकत में सदियों का फासला है। स्वप्न स्मृति से फिसल जाती है, सच आलिंगन में रह जाता है।

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